IPO लर्निंग गाइड
एंकर निवेशक — बड़े संस्थागत निवेशक जिन्हें IPO खुलने से एक दिन पहले शेयर अलॉट होते हैं — SEBI के नियमों के तहत एक तय अवधि तक अपने शेयर बेच नहीं सकते। इस एंकर निवेशक लॉक-इन अवधि पर बारीक़ी से नज़र रखी जाती है, क्योंकि इसकी समाप्ति से नए लिस्ट हुए स्टॉक में बिकवाली और क़ीमत में उतार-चढ़ाव आ सकता है।
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एंकर निवेशक Qualified Institutional Buyers (QIB) होते हैं — म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जैसे बड़े संस्थान — जिन्हें IPO खुलने से एक दिन पहले, इश्यूअर द्वारा तय भाव पर, IPO के शेयरों का एक हिस्सा अलॉट किया जाता है।
मौजूदा SEBI ICDR नियमों के तहत, एंकर निवेशक के शेयर अलॉटमेंट की तारीख़ से दो हिस्सों में लॉक-इन रहते हैं:
SEBI इन लॉक-इन नियमों को पहले भी बदल चुका है और आगे भी बदल सकता है — हमेशा किसी ख़ास IPO के RHP और नवीनतम SEBI सर्कुलर से सटीक ट्रैंच बंटवारा जाँच लें।
मौजूदा SEBI नियमों के तहत, 50% एंकर शेयर 90 दिन के लिए और बाक़ी 50% अलॉटमेंट की तारीख़ से 30 दिन के लिए लॉक-इन रहते हैं।
हमेशा नहीं — यह इस पर निर्भर करता है कि एंकर निवेशक बेचना चाहते हैं या नहीं। इससे उस तारीख़ को बिकवाली योग्य फ़्लोट ज़रूर बढ़ जाता है, जिससे बिकवाली होने पर क़ीमत पर दबाव बन सकता है।
एंकर निवेशक अलॉटमेंट लिस्ट आमतौर पर IPO खुलने से एक दिन पहले एक्सचेंज (BSE/NSE) से जारी होती है, और कंपनी के RHP व लिस्टिंग खुलासों में भी इसका ज़िक्र होता है।